मखमली आवाज की बौछार से सुनने वालों के तन - मन को भिगो देने वाले ' गज़ल के जादूगर ' जगजीत सिंह ने अपना आखिरी गीत फिल्म ' बंदूक ' के लिए गाया था और इस गीत की रिकॉर्डिंग पांच घंटे में पूरी हुई थी। यह बात जगजीत सिंह की 71 वीं जयंती पर आयोजित एक संगीत गोष्ठी में ' बंदूक ' के ऐक्टर और डायरेक्टर आदित्य ओम ने उजागर की। राजनीति और अपराध के गठबंधन तथा उत्तर प्रदेश में फल - फूल रही बंदूक संस्कृति पर आधारित इस फिल्म के लिए जगजीत सिंह की आवाज में रिकॉर्ड हुए उनके इस अंतिम फिल्मी गीत का विडियो मार्च में यू - ट्यूब पर डाला जाएगा। जगजीत सिंह ने रिकॉर्डिंग की विडियो क्लिप देखने की इच्छा जाहिर की थी , मगर उनकी यह इच्छा अधूरी रह गई।
आदित्य ओम ने बाद में एनबीटी से एक खास बातचीत में कहा, ' फिल्म बंदूक का मेसेज और खांटी हिंदी में शिवसागर का लिखा यह थीम सॉन्ग ' मृगतृष्णा मरुस्थल की , चलती रेत रूप धर जल की , जीवन - मरण के बीच में सांसें, कभी हैं गिरती कभी संभलती ' जगजीत सिंह को काफी पसंद आया था। पहले यह गीत हरिहरण से गवाने की योजना थी , लेकिन संगीतकार निखिल कामत ने सुझाव दिया कि जगजीत जी से पूछकर देखते हैं। बात बन गई। जगजीतजी ने गाने के बोल सुने तो गदगद हो गए और बिना पैसों की बात किए फौरन गाने को तैयार हो गए। '
आदित्य ने आगे बताया, ' तय हुआ कि देहरादून या मॉरिशस के कंसर्ट से लौटने के बाद रिकॉर्ड करेंगे , लेकिन अचानक पता नहीं क्या उनके मूड में आया कि देहरादून जाने से पहले ही उन्होंने रिहर्सल की डेट दे दी। गाना बार - बार पढ़कर उन्होंने याद कर लिया। कैलाश खेर के स्टूडियो में रिहर्सल के बाद उनका ऐसा मूड बना कि माइक पर जाकर गाना शुरू कर दिया और चार बजे से नौ बजे तक लगातार पांच घंटे गाते रहे। सिर्फ मुखड़े को ही उन्होंने 20 अलग - अलग अंदाज़ में इतनी खूबसूरती से गाया कि यह चुनना मुश्किल हो गया कि किसे रखें , किसे हटाएं। '
यहां किसी नई सिंगर की बात नहीं हो रही। बल्कि गोल्ड की बात हो रही है। हाल ही में एक इंटरव्यू में डर्टी पिक्चर के ऊह ला..ला..ला से फिर से खबरों में आए बप्पी लाहड़ी ने अपने गोल्ड लव पर दिल खोलकर रखा। सोना चूंकि उनके लिए लकी है, इसलिए वे हमेशा खुद को सोने में बांधे रहते हैं।
वे गणेश भगवान के भक्त हैं, इसलिए उनके गले में हथेली के आकार का सोने का पेंडल लटका रहता है। हालांकि वे उनका मजाक उड़ाने वालों से नाराज भी बहुत हैं।
उनका कहना है कि गोल्ड लव कोई गलत आदत तो है नहीं, जो टीवी और पिक्चरों में उनका मजाक उड़ाया जाता है। ऐसे लोगों को खुद पहले कोई मुकाम पा लेना चाहिए, फिर इतनी हिम्मत करनी चाहिए।