रहस्यमयी है बाथू की लड़ी मंदिर
रहस्यमयी है बाथू की लड़ी मंदिर
15, Mar 2018,07:03 AM
ANI, Himachal pradesh

बाथू की लड़ी मंदिर में एक ऐसा रहस्य है जो सारे विज्ञान को फेल साबित कर देता है।मौसम चाहे जैसा भी हो यहां सूर्य अस्त तभी होता है, जब सूरज की आखिरी किरणें बाथू मंदिर में विराजमान महादेव के चरण छूती हैं।मुगल काल में इस अद्भुत रहस्य को देखकर मुगल बादशाहों ने पूरी ताकत लगा दी।ताकि मंदिर में सूर्य की किरणों को जाने से रोका जा सके।उनकी तमाम कोशिशें बेकार हो गईं।आज भी मंदिर का ये रहस्य लोगों को हैरानी में डाल देता है।महाभारत काल में बाथू पत्थर से बने बाथू की लड़ी मंदिर में कुल 6 मंदिर हैं। इनमें से पांच छोटे मंदिर हैं, जबकि एक मुख्य मंदिर है।इन छोटे-छोटे मंदिरों में भगवान विष्णु और शेष नाग की मूर्तियां हैं।जबकि मुख्य मंदिर में महादेव का शिवलिंग विराजमान है।मंदिर की बनावट कुछ ऐसी की गई है कि कोई भी दिन ऐसा नहीं बीतता जब सूर्य की किरणें महादेव का चरण छूए बिना अस्त हो जाती हो।कहते हैं त्रेता युग से पहले अज्ञातवास के दौरान पांडवों ने यहां आश्रय लिया था।और भगवान शिव की पूजा करने के लिए बाथू पत्थर से इस मंदिर का निर्माण किया था।इसलिए इस मंदिर का नाम बाथू की लड़ी, यानी बाथू की माला पड़ी।

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