कैसे होती है एक साथ सभी देवताओं की पूजा
कैसे होती है एक साथ सभी देवताओं की पूजा
16, Mar 2018,07:03 AM
ANI, Uttarakhand

उत्तराखंड के उत्तरकाशी में एक ऐसी यात्रा होती है जिसमें 33 करोड़ देवी-देवताओं के दर्शन होते हैं। यानि 33 करोड़ देवी-देवताओं की पूजा का फल एक दिन में मिल जाता है। वरुणा नदी में स्नान के साथ शुरू होने वाली यात्रा वरुणावत पर्वत के ऊपर से गुजरते हुए असी गंगा और भागीरथी के संगम पर पूजा-अर्चना के साथ संपन्न होती है। स्कंद पुराण के केदारखंड के अनुसार वरुणावत पर्वत की पैदल परिक्रमा वाली वारुणी यात्रा सच्चे मन से करने पर श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं तथा हजारों तीर्थों की यात्रा का पुण्य लाभ मिलता है। करीब 18 किमी लंबी इस पदयात्रा के पथ पर बड़ेथी संगम स्थित वरुणेश्वर, बसूंगा में अखंडेश्वर, साल्ड में जगरनाथ और अष्टभुजा दुर्गा, ज्ञाणजा में ज्ञानेश्वर और व्यास कुंड, वरुणावत शीर्ष पर शिखरेश्वर तथा विमलेश्वर महादेव, संग्राली में कंडार देवता, पाटा में नर्वदेश्वर मंदिर में जलाभिषेक और पूजा-अर्चना का सिलसिला चलता है। वरुणावत से उतरकर श्रद्धालुओं ने गंगोरी में असी गंगा और भागीरथी के संगम पर स्नान के बाद नगर के विभिन्न मंदिरों में पूजा-अर्चना एवं जलाभिषेक के साथ काशी विश्वनाथ मंदिर पहुंचकर यात्रा संपन्न की। इस यात्रा का उल्लेख स्कंन्दपुराण के केदारखंड मे भी है। जिसमे बताया गया है पहले ये यात्रा साधुसंत करते थे।धीरे धीरे पुराणो के अध्ययन से आम लोग भी इस यात्रा मे जाने लगे है। इस यात्रा का शुभ फल 5 बार यात्रा करने से मिलता है। इसी यात्रा के बाद गंगोत्री यमनोत्री धाम के कपाट खोलने की  तैयारी भी शुरू हो जाती है।अस्था औऱ विश्वास से भरी वरुणी यात्रा कई गांवों से होकर गुजरती है और इस यात्रा मे पडने वाले गांव के लोग श्रद्वालुओ के लिए जलपान फलहार की व्यवस्था करते है। सिर्फ एक दिन की ये वरूणी यात्रा के बाद से गंगोत्री और यमुनोत्री धाम की यात्रा की तैयारी भी शुरू हो जाती है। ऐसे में अंदाजा लगाता मुश्किल नहीं है कि इस यात्रा का कितना बढ़ा महत्व है।

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