हिमाचल प्रदेश: एक ऐसा धाम जहां नेत्र रोग को दूर करती हैं मां
हिमाचल प्रदेश: एक ऐसा धाम जहां नेत्र रोग को दूर करती हैं मां
27, Mar 2018,11:03 AM
ANI, Himachal pradesh

माता नैना देवी के मंदिर से दो कहानियां भी जुड़ी हुई हैं कहा जाता है कि जब माता सती ने अपने पिता महाराजा दक्ष प्रजापति के हवन यज्ञ में आत्मदाह कर लिया था तो उससे भगवान शिव व्यथित हो उठे और  उन्होंने सती के शव को कंधे पर उठाया और तांडव करना शुरू कर दिया| इसने स्वर्ग में सभी देवताओं को भयभीत कर दिया। उसके बाद देवताओं ने भगवान विष्णु से यह आग्रह किया कि वो अपने चक्र से सती के शरीर को 52 टुकड़ों में काट दें | श्री नैना देवी मंदिर वह जगह है जहां सती की आंखें गिरीं  और उस समय जहां -जहां भी माता सती के अंग गिरे वहां शक्तिपीठों की स्थापना हुई। श्री नैना देवी में माता सती के नेत्र गिरे थे इसीलिए इस शक्तिपीठ का नाम श्री नैना देवी पड़ा।

इस शक्ति पीठ से एक और कहानी जुड़ी हुई है। मान्यता है कि नैना नाम का गुज्जर लड़का अपने मवेशियों को चराने गया और देखा कि एक सफेद गाय अपने थनों से एक पत्थर पर दूध बरसा रही है| उसने अगले कई दिनों तक इसी बात को देखा| एक रात जब वह सो रहा था, तब उसने देवी मां को सपने मे ये कहते हुए देखा कि वह पत्थर उनकी पिंडी है| उसके बाद उस लड़के ने पूरी बात राजा बीर चंद को बताई| जिसके बाद राजा ने लड़के की सच्चाई को परखने के बाद उसी स्थान पर श्री नैना देवी मंदिर का निर्माण करवाया| माता के इस शक्तिपीठ में दूर-दूर से भक्त आते हैं और मां का आशीष लेते हैं। आस्था और विश्वास के साथ आंखों के रोग से परेशान लोग हर साल यहां आते हैं और मां का आशीष लते हैं।

ये भी पढ़ें :

बिजली विभाग के लापरवाही के कारण किसान की मौत

खबरें