इस वीरान टापू में चलती है गुड़ियो की सल्तनत
इस वीरान टापू में चलती है गुड़ियो की सल्तनत
30, Mar 2018,11:03 AM
ANI,

हर पेड़ पर गुड़िया....जहां तक नजर दौड़ाओं वहां तक गुड़िया नजर आएगी आपको...इस खौफनाक टापू पर हैं सिर्फ गुड़िया क्योंकि इस द्वीप पर चलता है गड़िया का राज। मेक्सिको का ला इस्ला डे ला म्यूनेकस में आत्मा का वास है। दावा किया जाता है कि इस द्वीप में किसी बच्ची की आत्मा रहती है। लेकिन आप सोच रहे होंगे आत्मा से गुड़िया का क्या लेना देना। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्ची की आत्मा को शांत रखने के लिए यहां गुड़िया रखीं गई है। स्थानीय लोगों का तो यहां तक कहना है कि रात में इस टापू पर जो गया वो फिर लौट कर नहीं आया। क्योंकि पापी गुड़िया को किसी भी शख्स की मौजूदगी बर्दाश्त नहीं है। पापी गुड़िया का टापू को डॉल्स आइलैंड के नाम से भी जाना जाता है। किसी जमाने में ये बेहद खूबसूरत जगह हुआ करती थी, लेकिन आज यहां गुड़ियों का डेरा है। ये द्वीप डरावनी गुड़ियों से अटा पड़ा है। जो आपस में बातें भी करती हैं। क्योंकि इन गुड़ियों में प्रेतात्मा का वास है। वे इशारों में लोगों को अपनी ओर आकर्षित करती हैं। कुछ का तो ये भी कहना है कि इनकी आंखों की पुतलियां तक घूमती हैं। ये टापू हमेशा से ऐसा नहीं था। एक समय था जब टापू खूबसूरत हुआ करता था यहां चारों ओर खुशहाली थी लेकिन आज यहां सिर्फ मनहूसियत फैली हुई है। करीबन डेढ़ दशक पहले ये साधारण द्वीप हुआ करता था। ऐसे में सवाल उठता है कि इस द्वीप पर इतनी मात्रा में गुड़िया कैसे पहुंची। इसे किसने लटकाया और उसके पीछे क्या वजह है। इस द्वीप के भुतिया होने के पीछे एक कहानी बताई जाती है। करीब 60 साल पहले डॉन जूलियन सैन्टाना बरेरा इस द्वीप का केयर टेकर था। लेकिन एक दिन जूलियन की जिंदगी में खलल पड़ गया। एक दिन जूलियन के सामने टापू में एक लड़की ने खुदकुशी कर ली। जूलियन सामने था फिर भी उसे नहीं बचा पाया। लड़की तो मर गई लेकिन मरने के दौरान लड़की के हाथ में एक गुड़िया थी। जिससे वो लड़की बेहद प्यार करती थी। कहा जाता है कि उस दिन के बाद इस टापू पर गुड़िया का कब्जा हो गया। और वहीं उस हादसे के बाद जूलियन पागल सा हो गया वो गुड़िया लाकर इस टापू पर जमकर करने लगा। फिर एक दिन जूलियन की भी रहस्यमय तरीके से मौत हो गई। जिसके बाद ये टापू वीरान हो गया। साल 1990 में दुनिया के सामने ये टापू आया फिर उसके बाद दिन में यहां सैलानी आते हैं। और कई सैलानी यहां आते हैं और गुड़िया छोड़ जाते हैं। दिन में पर्य़टक आते हैं लेकिन रात के वक्त कोई भी सुरमां यहां रुकने की हिम्मत नहीं जुटा पाता। क्योंकि रात को यहां बच्ची की आत्मा घूमती है। जिसे किसी की दखल अंदाजी पसंद नहीं।

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