सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से किया बाहर
सुप्रीम कोर्ट ने समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से किया बाहर
06, Sep 2018,04:09 PM
TV100,

सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों वाली बेंच ने गुरुवार को ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया है। धारा 377 पर फैसला सुनाते हुए चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली पीठ ने दो वयस्को के बीच सहमति से बनाए गए संबंधों को अपराध मानने से खारिज कर दिया। साथ ही जजों ने कहा कि हमें सभी समान रूप से देखना होगा। सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले को ऐतिहासिक बताया जा रहा है और आम लोगों से लेकर नेताओं और बॉलीवुड सेलिब्रिटी तक सभी इस पर प्रतिक्रिया दे रहे हैं। इसी बीच आरएसएस ने  भी कोर्ट के इस फैसले को लेकर बयान दिया है। 

न्यूज एजेंसी भाषा के मुताबिक, राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के पदाधिकारी अरूण कुमार ने कहा कि आरएसएस समलैंगिकता को अपराध नहीं मानता लेकिन समान लिंग के जोड़ों के बीच विवाह प्रकृति के विरुद्ध है। अरुण ने कहा कि ये संबंध प्रकृतिक नहीं है इसलिए हम शादी का समर्थन नहीं करते। परंपरा से भारत का समाज भी इस प्रकार के संबंधों को मान्यता नहीं देता। वहीं दूसरी तरफ कंग्रेस ने सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले पुरजोर समर्थन किया है। कांग्रेस ने समलैंगिकता को अपराध नहीं करार देने के फैसले को 'बेहद महत्वपूर्ण' बताया और कहा कि यह एक उदार और सहिष्णु समाज की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। 

कांग्रेस नेता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने एक ट्वीट में कहा, सुप्रीम कोर्ट का धारा 377 पर फैसला बेहद महत्वपूर्ण है। एक पुराना औपनिवेशिक कानून जो आज के आधुनिक समय की सच्चाई से अलग था, समाप्त हो गया, मौलिक अधिकार बहाल हुए हैं और लैंगिक-रुझान पर आधारित भेदभाव को अस्वीकार किया गया है। यह एक उदार और सहिष्णु समाज की ओर एक महत्वपूर्ण कदम है। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने भारत में एलजीबीटीआईक्यू (समलैंगिक समुदाय) के पक्ष में एक ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए समलैंगिक यौन संबंध को अपराध नहीं बताया है, जिसके बाद कांग्रेस की यह टिप्पणी आई है।

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