CBI विवाद : सीलबंद लिफाफे के सार्वजानिक होने पर चीफ जस्टिस रंजन गोंगोई ने जताई नाराजगी
CBI विवाद : सीलबंद लिफाफे के सार्वजानिक होने पर चीफ जस्टिस रंजन गोंगोई ने जताई नाराजगी
20, Nov 2018,12:11 PM
Edited By Aarti Singh,

सुप्रीम कोर्ट में चल रहे CBI VS CBI  विवाद पर सुप्रीम कोर्ट के निदेशक आलोक वर्मा की तरफ से दाखिल की गयी याचिका को 29 नवंबर तक सुनवाई को रद्द कर दिया गय है। आज की याचिका पर कोर्ट में तर्क वितर्क का माहौल भी देखने को मिला साथ ही चीफ जस्टिस रंजन गोंगोई ने सीलबंद लिफाफे की बातें सार्वजानिक होने पर नाराजगी भी दिखाई जबकि सुप्रीम कोर्ट ने अपनी पिछली सुनाई में इस बात के लिये पहले ही अगाह कर दिया था, कि सीवीसी की जांच रिपोर्ट और उस पर आलोक वर्मा का जवाब सीलबंद लिफाफे में कोर्ट को सौंपा जाएगा जिसके बावजूद सीलबंद लिफाफे को सार्वजानिक कर दिया और साथ ही  आलोक वर्मा के जवाब का हवाला देते हुए मीडिया में रिपोर्ट छापी 

मंगलवार सुबह कोर्ट में सुनवाई शुरू होते ही चीफ जस्टिस रंजन गोगोई ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के वकील फली नरीमन को कुछ दस्तावेज दिए और उन्हें बतौर वरिष्ठ वकील पढ़ने के लिए कहा। कोर्ट ने फली नरीमन से पूछा कि जो बातें आलोक वर्मा के जवाब में हैं, वही चीजें बाहर कैसे आईं। इस पर फली नरीमन ने कोर्ट के सामने बताया कि उन्हें खुद इसकी जानकारी नहीं है। फली नरीमन ने चीफ जस्टिस के सामने कहा कि रिपोर्ट का लीक होना गलत है और वह खुद इससे परेशान हूं।

क्या था पूरा मामला

राकेश अस्थाना के खिलाफ एफआईआर दर्ज होने के बाद सीबीआई के कुछ अधिकारियों की गिरफ्तारियां भी की गई थीं। जिसके जवाब में राकेश अस्थाना ने सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के खिलाफ ही करप्शन के आरोप लगाए थे। सीबीआई के दोनों बड़े अधिकारियों के बीच पनपे इस विवाद के बाद केस की जांच सीवीसी को सौंपी गई थी और 23 अक्टूबर को दोनों अधिकारियों को छुट्टी पर भेज दिया गया था। केंद्र सरकार ने तर्क दिया था, दोनों अधिकारियों के पद पर रहते हुए निष्पक्ष जांच न होने की आशंकाएं हैं, जिसके चलते दोनों को छुट्टी पर भेजना का निर्णय लिया गया है।

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