राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद, 10 जनवरी तक टला, सुनवाई के लिए बनेगी नई बेंच
राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद, 10 जनवरी तक टला, सुनवाई के लिए बनेगी नई बेंच
04, Jan 2019,11:01 AM
Edited BY: Aarti Singh,

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद भूमि विवाद मामले पर सुनवाई हुई। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अगले कुछ दिनों में इस मामले के लिए नई बेंच का गठन कर लिया जाएगा और 10 जनवरी को मामले को सुना जाएगा। राजनीतिक दृष्टि से संवेदनशील और अदालत में लंबे समय से अटके अयोध्या भूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई टल गई है। सबकी निगाहें सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर टिकी थी लेकिन कोर्ट ने इस मामले को फिलहाल, अगली सुनवाई तक के लिए टाल दिया। इसके अलावा कोर्ट ने रोजाना सुनवाई की मांग को खारिज कर दिया है। अब संभवतः 10 जनवरी के बाद ही राम जन्मभूमि मामले का भविष्य का रोडमैप तय होगा। 10 प्वाइंट्स में जानिए इस मामले से जुड़ी अहम बातें। 

1. सुप्रीम कोर्ट में तकरीबन आठ साल से लंबित अयोध्या भूमि मामले में मुख्य न्यायधीश रंजन गोगोई की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई 10 जनवरी तक के लिए टाल दी है।

2. मुख्य न्यायाधीश रंजन गोगोई और न्यायमूर्ति संजय किशन कौल की पीठ के समक्ष राम जन्मभूमि विवाद से जुड़ी कुल 15 याचिकाएं लगी हैं। 

3. सुप्रीम कोर्ट ने इन याचिकाओं पर सुनवाई के लिए बेंच का गठन, प्रक्रिया और तारीखों को तय करने का मामला फिलहाल टाल दिया है। 

4. कोर्ट के सामने एक याचिका ये भी है, जिसमें मांग की गई है कि अगर तय समय में सुनवाई नहीं हो सकती तो कोर्ट अपने आदेश में कारण बताए कि एक तय समय में सुनवाई क्यों नहीं हो सकती। इसके अलावा रोजाना सुनवाई की मांग कोर्ट ने खारिज कर दी है। 

आपको बता दें कि साल 1994 के इस फैसले में टिप्पणी की गई थी कि मस्जिद इस्लाम का अभिन्न अंग नहीं है. अयोध्या मामले की सुनवाई के दौरान एक अपीलकर्ता के वकील ने 1994 के फैसले में की गई इस टिप्पणी के मुद्दे को उठाया था।

अनेक हिन्दूवादी संगठन विवादित स्थल पर राम मंदिर के जल्द निर्माण करने के लिए अध्यादेश लाने की मांग कर रहे हैं. इस बीच शीर्ष अदालत में शुक्रवार को होने वाली सुनवाई महत्वपूर्ण हो गई है। क्योंकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मंगलवार को ही कहा था कि अयोध्या में राम मंदिर के मामले में न्यायिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही अध्यादेश लाने के बारे में निर्णय किया जा सकता है। 

 

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