लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार की आरक्षण लॉलीपॉप, विपक्षी पार्टियों पर क्या असर डाल रही है?  
लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार की आरक्षण लॉलीपॉप, विपक्षी पार्टियों पर क्या असर डाल रही है?  
08, Jan 2019,10:01 AM
Edited BY: Aarti Singh,

लोकसभा चुनाव से ऐन पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने पर मुहर लगा दी है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले को चुनाव से पहले का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। इस फैसले के तहत सरकारी नौकरी और शिक्षा के क्षेत्र में सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। कैबिनेट की मुहर लगने के बाद आज इसके लिए संविधान संशोधन बिल संसद में पेश किया जाएगा।

भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी कर दिया है, जबकि कांग्रेस ने पहले ही अपने सांसदों के लिए सोमवार और मंगलवार को उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया था।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को संवैधानिक संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। भाजपा के समर्थन का आधार मानी जाने वाली अगड़ी जातियों की लंबे समय से मांग थी कि उनके गरीब तबकों को भी आरक्षण का लाभ दिया जाए। सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए संवैधानिक संशोधन विधेयक 2018 (कांस्टीट्यूशन एमेंडमेंट बिल टू प्रोवाइड रिजर्वेशन टू इकोनॉमिक वीकर सेक्शन -2018) मंगलवार को लोकसभा में पेश करेगी। इस विधेयक के जरिए संविधान की धारा 15 व 16 में बदलाव किया जाएगा। 

वहीं, सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के आरक्षण से छेड़छाड़ न हो और गरीबों के बच्चों को शिक्षा एवं रोजगार में आरक्षण मिले, हम पूरी तरह सरकार के साथ रहेंगे। वहीं, एनसीपी और ‘आप' ने भी इसे समर्थन देने की बात कही है। दूसरी ओर बसपा पहले से ही इसकी मांग करती रही है।

इन अगड़ी जातियों को लाभ

सूत्रों के मुताबिक, कानून का लाभ ब्राह्मण, राजपूत, जाट, मराठा, भूमिहार, कई व्यापारिक जातियों, कापू और कम्मा सहित कई अगड़ी जातियों को मिलेगा। अन्य धर्मों के गरीब भी दायरे में आएंगे।

लोकसभा चुनाव से पहले मोदी सरकार की आरक्षण लॉलीपॉप, विपक्षी पार्टियों पर क्या असर डाल रही ह?  

लोकसभा चुनाव से ऐन पहले केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने गरीब सवर्णों को आरक्षण देने पर मुहर लगा दी है।  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के इस फैसले को चुनाव से पहले का मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है। इस फैसले के तहत सरकारी नौकरी और शिक्षा के क्षेत्र में सवर्णों को आर्थिक आधार पर 10 फीसदी आरक्षण दिया जाएगा। कैबिनेट की मुहर लगने के बाद आज इसके लिए संविधान संशोधन बिल संसद में पेश किया जाएगा।

भारतीय जनता पार्टी ने अपने सभी सांसदों को सदन में उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी कर दिया है, जबकि कांग्रेस ने पहले ही अपने सांसदों के लिए सोमवार और मंगलवार को उपस्थित रहने के लिए व्हिप जारी किया था।

इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सोमवार को संवैधानिक संशोधन प्रस्ताव को मंजूरी दे दी। भाजपा के समर्थन का आधार मानी जाने वाली अगड़ी जातियों की लंबे समय से मांग थी कि उनके गरीब तबकों को भी आरक्षण का लाभ दिया जाए। सरकार आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लिए संवैधानिक संशोधन विधेयक 2018 (कांस्टीट्यूशन एमेंडमेंट बिल टू प्रोवाइड रिजर्वेशन टू इकोनॉमिक वीकर सेक्शन -2018) मंगलवार को लोकसभा में पेश करेगी। इस विधेयक के जरिए संविधान की धारा 15 व 16 में बदलाव किया जाएगा। 

वहीं, सरकार के फैसले का समर्थन करते हुए कांग्रेस प्रवक्ता रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि दलितों, आदिवासियों और पिछड़ों के आरक्षण से छेड़छाड़ न हो और गरीबों के बच्चों को शिक्षा एवं रोजगार में आरक्षण मिले, हम पूरी तरह सरकार के साथ रहेंगे। वहीं, एनसीपी और ‘आप' ने भी इसे समर्थन देने की बात कही है। दूसरी ओर बसपा पहले से ही इसकी मांग करती रही है।

इन अगड़ी जातियों को लाभ

सूत्रों के मुताबिक, कानून का लाभ ब्राह्मण, राजपूत, जाट, मराठा, भूमिहार, कई व्यापारिक जातियों, कापू और कम्मा सहित कई अगड़ी जातियों को मिलेगा। अन्य धर्मों के गरीब भी दायरे में आएंगे।

ये भी पढ़ें :

दिल्ली-एनसीआर में नहीं दिख रहे सर्दी से बचने के आसार

खबरें