राम रहीम की सजा का एलान आज, वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगी पेशी
राम रहीम की सजा का एलान आज, वीडियो कांफ्रेंसिंग से होगी पेशी
17, Jan 2019,09:01 AM
TV100,

पत्रकार छत्रपति हत्याकांड में डेरा सच्चा सौदा प्रमुख राम रहीम समेत चार दोषियों को आज सजा सुनाई जाएगी, पेशी वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए होगी। 16 साल बाद सीबीआई की विशेष अदालत ने मर्डर केस में 11 जनवरी को राम रहीम, कृष्ण लाल, निर्मल सिंह और कुलदीप सिंह को दोषी करार दिया।
मामले की संवेदनशीलता व प्रदेश में सुरक्षा व कानून व्यवस्था को देखते हुए सजा वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए सुनाई जा रही है। इसे लेकर हरियाणा सरकार ने याचिका लगाई थी, जिसे मंजूर करते हुए बुधवार 16 जनवरी को सीबीआई की विशेष कोर्ट ने वीसी के जरिए पेशी कराने के आदेश जारी किए।

कृष्ण, निर्मल और कुलदीप को अंबाला सेंट्रल जेल में सजा सुनाई जाएगी और राम रहीम को सुनारिया जेल में ही सजा सुनाई जाएगी। चारों को आईपीसी की धारा 302 और IPC की धारा 120बी के तहत दोषी करार दिया गया है, जबकि आरोपी कृष्ण लाल को 1959 आर्म्स एक्ट के सेक्शन 29 के तहत भी दोषी करार दिया गया है। आरोपी निर्मल सिंह को 1959 आर्म्स एक्ट के सेक्शन 25 के तहत भी दोषी करार दिया गया है।

खट्टा सिंह की गवाही अहम रही 
राम रहीम के पूर्व ड्राइवर खट्टा सिंह ने गवाही में कहा था कि पत्रकार रामचंद्र छत्रपति की हत्या करने के लिए बाबा ने ही कृष्ण लाल, कुलदीप और निर्मल सिंह को आदेश दिया था। राम रहीम 23 अक्टूबर 2002 को जालंधर के एक सत्संग से सिरसा वापस पहुंचा तो उसे कृष्ण लाल ने अखबार दिखाया, जिसमें साध्वियों के यौन शोषण के बारे में खबर छपी थी। खबर पढ़ते ही राम रहीम तिलमिला उठा और उसने मेरे सामने कृष्ण लाल, कुलदीप और निर्मल को आदेश दिया कि रामचंद्र छत्रपति को मौत के घाट उतार दो। इसके बाद 24 अक्टूबर 2002 को रामचंद्र छत्रपति को उसके घर के बाहर गोलियों से भून दिया गया।

इस तरह अंजाम दिया गया था हत्याकांड साध्वियों का यौन शोषण करने संबंधी चिट्ठी पत्रकार छत्रपति के मर्डर का कारण बनी। छत्रपति ने अपने सांध्य कालीन समाचार पत्र ‘पूरा सच’में इस संबंध में अनाम साध्वी का पत्र प्रकाशित किया था। इस खबर के प्रकाशित होने के बाद राम रहीम के लोग पत्रकार राम चंद्र छत्रपति को धमकियां देने लगे थे।

इसके बावजूद पत्रकार निर्भीक होकर राम रहीम के खिलाफ लिखते रहे। 24 अक्टूबर 2002 को सिरसा के पत्रकार रामचंद्र छत्रपति पर हमला कर उन्हें गोलियों से छलनी कर दिया गया था। 21 नवंबर 2002 को दिल्ली के अपोलो अस्पताल में रामचंद्र छत्रपति जिंदगी की लड़ाई हार गए, लेकिन उनके बेटे अंशुल छत्रपति ने हार नहीं मानी।

अंशुल ने सीबीआई जांच की मांग के लिए पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में याचिका दायर की। नवंबर 2003 में हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने एफआईआर दर्ज की। 2004 में डेरा सच्चा सौदा ने यह जांच रुकवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दाखिल की थी, पर सुप्रीम कोर्ट ने यह याचिका खारिज कर दी।

करीब 16 साल इस केस की सुनवाई पंचकूला की स्पेशल सीबीआई कोर्ट में चली। 31 जुलाई 2007 के मामले में चार्जशीट दाखिल की गई थी। 12 दिसंबर 2008 के सभी आरोपियों पर आरोप तय किए गए। मामले में अभियोजन पक्ष की ओर से 46 गवाह पेश किए गए। बचाव पक्ष की ओर से 21 गवाह पेश किए गए। 2 जनवरी 2019 को हुई सुनवाई के दौरान केस में बहस पूरी हुई।

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