चालू खाते का घाटा बढ़कर 2.1 फीसदी, राजकोषीय घाटे में भी उछाल
चालू खाते का घाटा बढ़कर 2.1 फीसदी, राजकोषीय घाटे में भी उछाल
29, Jun 2019,10:06 AM
tv100,

पिछले वित्त वर्ष में देश का चालू खाते का घाटा (कैड) बढ़कर जीडीपी के 2.1 फीसदी के बराबर पहुंच गया है। रिजर्व बैंक ने शुक्रवार को बताया कि 2018-19 की चौथी तिमाही में कैड घटने के बावजूद पूरे साल के परिदृश्य में यह बढ़ा है। इसी तरह, राजकोषीय घाटा भी दो महीने में तय लक्ष्य का आधे से ज्यादा हो गया है।

रिजर्व बैंक ने बताया कि चालू खाते का घाटा विदेशी मुद्रा की निकासी और आवक के बीच का अंतर होता है। यह वित्त वर्ष 2017-18 में जीडीपी के मुकाबले 1.8 फीसदी यानी 48.7 अरब डॉलर रहा था, जो 2019 में बढ़कर 57.2 अरब डॉलर पहुंच गया। हालांकि, वित्त वर्ष की अंतिम तिमाही (जनवरी-मार्च) में यह घटकर 0.7 फीसदी यानी 4.6 अरब डॉलर रहा, जो दिसंबर तिमाही में 2.7 फीसदी यानी 27.7 अरब डॉलर रहा था। 

मार्च 2018 में समाप्त तिमाही में कैड 1.8 फीसदी यानी 13 अरब डॉलर था। दूसरी ओर, महालेखा नियंत्रक ने आंकड़े जारी कर बताया कि 2019-20 में सरकार के राजकोषीय घाटे का लक्ष्य पहले दो महीने में ही आधे से ज्यादा हो गया है। इससे अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ेगा।

व्यापार घाटे ने बढ़ाया कैड
आरबीआई ने बताया कि 2018-19 में देश का व्यापार घाटा बढ़कर 180.3 अरब डॉलर पहुंच गया, जो एक साल पहले 160 अरब डॉलर रहा था। व्यापार घाटे में इस इजाफे का असर कैड पर भी दिखा है। हालांकि, मार्च तिमाही में व्यापार घाटा 35.2 अरब डॉलर रहा, जो एक साल पहले की समान तिमाही में 41.6 अरब डॉलर था। इस दौरान वास्तविक विदेशी निवेश में 2.4 अरब डॉलर की गिरावट रही, जो पिछले साल 22.1 अरब डॉलर थी।

दो महीने में सालभर के बराबर हुआ राजकोषीय घाटा
महालेखा नियंत्रक ने बताया कि चालू वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटे का 52 फीसदी का लक्ष्य महज दो महीने में ही पार हो गया। 2019-20 के पहले दो महीने में राजकोषीय घाटा 3,66,157 करोड़ रुपये रहा। पिछले वित्त वर्ष में राजकोषीय घाटा बजट अनुमान का 55.3 फीसदी रहा था। 

राजकोषीय घाटा सरकार के खर्च और राजस्व के बीच का अंतर होता है। फरवरी में पेश बजट में सरकार ने चालू वित्त वर्ष के लिए राजकोषीय घाटे का लक्ष्य 7.03 लाख करोड़ रुपये रखा था।

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