ISRO वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक बदली Chandrayaan-2 की कक्षा
ISRO वैज्ञानिकों ने सफलतापूर्वक बदली Chandrayaan-2 की कक्षा
24, Jul 2019,05:07 PM
TV100,

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों ने अपने दूसरे मून मिशन Chandrayaan-2 को पृथ्वी की कक्षा में आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है. 22 जुलाई को लॉन्च के बाद इसे पेरिजी (पृथ्वी से कम दूरी) 170 किमी और एपोजी (पृथ्वी से ज्यादा दूरी) 45475 किमी पर स्थापित किया गया था. इसकी कक्षा में आज यानी 24 जुलाई को दोपहर 2.00 से 3.30 बजे के बीच सफलतापूर्वक बदलाव किया गया है. अब इसकी पेरिजी 230 किमी और एपोजी 45163 किमी कर दी गई है

अभी 6 अगस्त तक पृथ्वी के चारों तरफ चंद्रयान-2 के ऑर्बिट को बदला जाएगा. 22 जुलाई को लॉन्च के बाद चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने के लिए चंद्रयान-2 की 48 दिन की यात्रा शुरू हो गई है. लॉन्चिंग के 16.23 मिनट बाद चंद्रयान-2 पृथ्वी से करीब 170 किमी की ऊंचाई पर जीएसएलवी-एमके3 रॉकेट से अलग होकर पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहा था. इसरो वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 के लॉन्च को लेकर काफी बदलाव किए थे

चंद्रयान-2 की सफल लॉन्चिंग के बाद भारत इस हफ्ते देश के पहले सिमुलेटेड (नकली) अंतरिक्ष युद्धाभ्यास आयोजित करने जा रहा है। इस दो दिवसीय युद्धाभ्यास को "IndSpaceEx" नाम दिया गया है। इस दौरान भारतीय सशस्त्र बल धरती से बाहर होने वाले संभावित युद्ध को देखते हुए अपने रणकौशल को निखारेंगे। इसके साथ ही भविष्य में आने वाले खतरों से निपटने के लिए संयुक्त अंतरिक्ष मसौदा भी तैयार किया जाएगा।

रक्षा मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले त्रिकोणीय सेवा एकीकृत रक्षा स्टाफ इस सप्ताह दो दिवसीय युद्धाभ्यास में अंतरिक्ष में मार करने की अपनी क्षमताओं को जांचेगा। चीनी अंतरिक्ष कार्यक्रम और उसके धरती के बाहर मार करने की क्षमताओं में लगातार वृद्धि करने के कारण भारत को ऐसा युद्धाभ्यास करना आवश्यक हो गया था।


भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के वैज्ञानिकों ने अपने दूसरे मून मिशन Chandrayaan-2 को पृथ्वी की कक्षा में आगे बढ़ाना शुरू कर दिया है. 22 जुलाई को लॉन्च के बाद इसे पेरिजी (पृथ्वी से कम दूरी) 170 किमी और एपोजी (पृथ्वी से ज्यादा दूरी) 45475 किमी पर स्थापित किया गया था. इसकी कक्षा में आज यानी 24 जुलाई को दोपहर 2.00 से 3.30 बजे के बीच सफलतापूर्वक बदलाव किया गया है. अब इसकी पेरिजी 230 किमी और एपोजी 45163 किमी कर दी गई है

अभी 6 अगस्त तक पृथ्वी के चारों तरफ चंद्रयान-2 के ऑर्बिट को बदला जाएगा. 22 जुलाई को लॉन्च के बाद चांद के दक्षिणी ध्रुव तक पहुंचने के लिए चंद्रयान-2 की 48 दिन की यात्रा शुरू हो गई है. लॉन्चिंग के 16.23 मिनट बाद चंद्रयान-2 पृथ्वी से करीब 170 किमी की ऊंचाई पर जीएसएलवी-एमके3 रॉकेट से अलग होकर पृथ्वी की कक्षा में चक्कर लगा रहा था. इसरो वैज्ञानिकों ने चंद्रयान-2 के लॉन्च को लेकर काफी बदलाव किए थे

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